रक्षा बंधन 28-8-2026 को भद्रा का साया पूरे दिन नहीं है।
पूर्णिमा सुबह 9:47 तक रहेगी।
राखी बांधने का समय -सुबह 6:02 से 9:47 तक ।दूसरा मुहूर्त (दोपहर) -12:28 से 2:00 बजे तक।वर्जित
तुला लग्न मे शुभ फल -व्यवसाय लोन से छुटकारा, धन लाभ।तुला लग्न मे अशुभ फल -व्यवसाय मे परेशानी, मेहनत ज्यादा लाभ कम, माता एंव भूमि सुख मे कमी।
वृश्चिक लग्न मे शुभ फल -भाग्य मे वृद्धि,
कर्क लग्न शुभ फल -स्वास्थ्य मे सुधार,विद्या मे लाभ, विवाह योग,अचानक धन प्राप्ति के योग, धार्मिक यात्रा से लाभ।कर्क लग्न अशुभ फल-डिप्रेशन की समस्या,लव विवाह मे असफलता, पेट की समस्या।
सिंह लग्न शुभ फल -विदेश योग,जमानत
मेष लग्न शुभ फल -भाग्य उदय,प्रॉपर्टी और यात्रा मे लाभ, विदेश जाने के योग, व्यापार मे लाभ।मेष लग्न अशुभ फल-बिना वजह से खर्च ज्यादा,माँ सुख मे कमी, परिवारिक मन मुटाव।
वृष लग्न शुभ फल -शादी का
मीन लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव 1,4,7,10 में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग बनता है। लेकिन लग्नेश गुरु देवता बलि होना अवश्यक है। गुरु ग्रह नीच के ना हो और ना ही 3,6,8,12
कुम्भ लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव 1,4,7,10 में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग बनता है। लेकिन लग्नेश शनि बलि होना अवश्यक है। शनि देव नीच के ना हो।
नोट-ग्रह का
मकर लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव 1,4,10 में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग बनता है। लेकिन लग्नेश शनि बलि होना अवश्यक है। शनि देव नीच के ना हो।
नोट-ग्रह
धनु लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव 1,4,7,10 में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग बनता है। लेकिन लग्नेश गुरु बलि होना अवश्यक है।
वृश्चिक लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव 1,4,7,10 में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग बनता है।
तुला लग्न की कुंडली में मंगल देवता लग्नेश शुक्र देवता के शत्रु होने के कारण मारक बनते है इसलिए इस लग्न कुंडली में रुचक नामक पंचमहापुरुष योग नहीं बनता।
कन्या लग्न की कुंडली में मंगल देवता लग्नेश बुध देवता के अति शत्रु होने के कारण अति मारक बनते है इसलिए इस लग्न कुंडली में रुचक नामक पंचमहापुरुष योग नहीं बनेगा।
सिंह लग्न की कुंडली में मंगल देवता अगर केंद्र भाव में हो अच्छे बल में तो रुचक नामक पंच महापुरुषयोग बनाता है लेकिन लग्नेश स्वामी सूर्य देव बलि होना अति आवश्यक है। रुचक नामक पंच महापुरुष होने के कारण
मंगल देवता कर्क लग्न कुंडली (जन्म कुंडली) में सम या योगकारक होकर केंद्र स्थान में चौथे भाव, सातवें भाव में उच्च के होकर और दशम भाव में स्वराशि का होकर बलि हो और डिग्री वाइज बलाबल अच्छा हो तो
मंगल देवता मिथुन लग्न कुंडली (जन्म कुंडली) में केंद्र भाव में हो तो रुचक नामक पंच महापुरुष योग नहीं बनता क्यों की मंगल देव बुध ग्रह लग्नेश के शत्रु होने के कारण इस कुंडली में मारक बनते है जिस
मंगल देवता वृष लग्न कुंडली (जन्म कुंडली) में केंद्र भाव में हो तो मंगल देव मारक होने के कारण रुचक नामक पंच महापुरुष याेग नहीं बनता।
रुचक नामक पंच महापुरुष योग मेष लग्न
मंगल देवता मेष लग्न कुंडली (जन्म कुंडली) में सम या योगकारक होकर केंद्र स्थान में पहले भाव में स्वराशि का, सातवें भाव में योगकारक होकर केंद्र में और दशम
पंच महापुरुष योग-PANCH MAHAPURUSH YOG
चार ग्रह जो की(सूर्य,चंद्र,राहु,केतु) पंचमहापुरुष योग नहीं बनाते।(पंचमहापुरुष योगों में नहीं आते)।
और यह पांच ग्रह पंचमहापुरुष योग बनाते है-
मंगल-( रुचक नामक पंचमहापुरुष योग )
बुध-( भद्र नामक पंचमहापुरुष योग )
गुरु-( हंस नामक पंचमहापुरुष
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? मीन लग्न…
मीन लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी गुरु,मंगल,चंद्र1,2,4,7,10,भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !
और
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? कुम्भ लग्न..
कुम्भ लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी शनि,बुध, शुक्र
1,4,5,7,9,10,11भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है
त्रिशक्ति रत्न कब पहने?मकर लग्न…
मकर लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी शनि,बुध, शुक्र
1,2,5,7,10,11भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !और
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? धनु लग्न…
धनु लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी गुरु,सूर्य,मंगल1,4,5,7,9,10,भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !और अधिक
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? वृश्चिक लग्न…
वृश्चिकलग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी मंगल,चंद्र,गुरु
2,4,5,7,10,11 भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !और
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? तुला लग्न…
तुला लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी बुध,शनि,शुक्र,1,2,4,5,9,10,11 भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !और
त्रिशक्ति रत्न कब पहने? कन्या लग्न
कन्या लग्न की जन्मकुंडली मे अगर त्रिकोण भाव के स्वामी बुध,शनि,शुक्र,2,4,5,9,10,11 भावों मे तीनो ग्रह या इनमे मे से कोई भी ग्रह इन्ही भावों बैठे हो तो त्रिशक्ति रत्न पहना जा सकता है !और
























