वृष लग्न की कुंडली में तीसरे भाव मे बैठे शनि और चंद्र देवता दोनों ही विष योग बनाएंगे क्यों की यहाँ शनि देव और चंद्र देव दोनों ही मारक है तो दोनों मारक होने के कारण विष योग बनाएंगे
वृष लग्न की कुंडली में पांचवे भाव मे बैठे चंद्र और शनि देव विष योग बनाएंगे लेकिन विष योग बनने की वजह चंद्र देव ही होंगे क्यों की चंद्र देवता इस लग्न कुंडली मे मारक है !शनि देवता विष
वृष लग्न की कुंडली मे छठे भाव मे बैठे चंद्र और शनि देव विष योग बनाएंगे क्यों की दोनों ग्रह इस लग्न कुंडली मे मारक है और भाव भी छठा जो की त्रिक स्थान है जो की अच्छा
वृष लग्न की कुंडली मे सातवें भाव मे बैठे चंद्र और शनि देव विष योग बनाएंगे लेकिन ध्यान देने योग्य बात यही है की यहाँ चंद्र देवता नीच के हो गए है और शनि देव योगकारक हुए तो विष
पुखराज रत्न कब धारण करें ?
पुखराज मिथुन लग्न
मिथुन लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,7,9,10,11 भावों अगर गुरु देव बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने की विधि-धातु-सोना,पीतल, पक्ष-शुक्लऊँगली-तर्जनी,दिन-गुरुवारसमय-सूर्य उदय
पुखराज रत्न कब धारण करें ?
कर्क लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,9,10,11 भावों अगर गुरु देव बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने की विधि-धातु-सोना,पीतल, पक्ष-शुक्लऊँगली-तर्जनी,दिन-गुरुवारसमय-सूर्य उदय के एक घंटे के अंदर!ध्यान
दशम भाव का मालिक शनि सप्तम भाव में उच्च के हो और चंद्र ग्रह साथ हो तो जातक प्रॉपर्टी सम्बन्ध कार्य या पार्टर्नशिप करके सफलता प्राप्त कर सकता है।
अगर दशम भाव का स्वामी शनि छठे भाव में हो और
विष योग वृष लग्न पार्ट-9
वृष लग्न की कुंडली मे नौवें भाव मे बैठे शनि और चंद्र देवता विष योग बनाएंगे लेकिन ध्यान देने योग्य बात यही है की यहां चंद्र देवता मारक होने की वजह से विष योग
पुखराज रत्न कब धारण करें ?
उपयुक्त रत्न पुखराजसिंह लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,7,9,10,11 भावों अगर गुरु देव बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने की विधि-धातु-सोना,पीतल, पक्ष-शुक्लऊँगली-तर्जनी,दिन-गुरुवारसमय-सूर्य उदय के एक घंटे
क्या आप जानते है ?कन्या लग्न कुंडली में कब पुखराज रत्न पहन सकते है ?
कन्या लग्न की कुंडली मे 1,2,4,7,9,10,11 भावों अगर गुरु देव बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने
नवम भाव मे बैठे शनि चंद्र विष योग बनाएंगे !लेकिन ध्यान दे के शनि देव अति योगकारक और स्वराशि ग्रह होने के कारण बुरा फल नही देंगे !यहाँ सिर्फ चंद्र देव ही बुरा फल देंगे !
फल -चंद्र देव
दशम भाव मे बैठे शनि और चंद्र विष योग बनाएंगे लेकिन ध्यान दें यहां बैठे शनि देव बुरा फल नहीं देंगे चंद्र देव देंगे जिनकी वजह से विष योग बनेगा !चंद्र देव शनि देव के अच्छे फल मे कमी
ग्यारहवें भाव मे बैठे शनि चंद्र दोनों ही विष योग बनाएंगे यहाँ दोनों ग्रह मारक है शनि देव नीच के होने की वजह से मारक हुए तो यहां दोनों ग्रह बुरा प्रभाव देंगे !
नीच के शनि देव शरीरिक
बारहवें भाव मे बैठे शनि चंद्र दोनों ही विष योग बनाएंगे लेकिन एक बात ध्यान देने योग्य यही है की कहीं शनि देव विपरीत राजयोग मे ना हो अगर शनि देव विपरीत राजयोग मे होंगे तो विष योग बनने
विष योग कर्क लग्न पार्ट-1
कर्क लग्न की कुंडली मे लग्न भाव मे बैठे शनि चंद्र विष योग बनाएंगे लेकिन यहाँ चंद्र देवता बुरा प्रभाव नहीं देंगे क्यूंकि लग्नेश अपनी ही राशि मे बैठे है इसलिए !शनि देवता
विष योग कर्क लग्न पार्ट-3
तीसरे भाव मे बैठे शनि देव कर्क लग्न मे विष योग बनाएंगे दोनों ग्रह ही यहाँ बैठे दोनों ग्रह बुरा फल देंगे क्यूंकि की दोनों ग्रह मारक हुए !
फल -तीसरे भाव मे बैठे
विष योग कर्क लग्न पार्ट-2
कर्क लग्न की कुंडली मे दूसरे भाव मे बैठे चंद्र शनि विष योग बनाएंगे लेकिन यहां शनि देव बुरा फल देंगे और चंद्र देव के अच्छे फलों मे कमी लाएंगे !
फल-शनि देव दूसरे भाव
चौथे भाव मे बैठे शनि चंद्र कर्क लग्न मे विष योग बनाएंगे लेकिन यहाँ चंद्र देवता योगकारक होकर केंद्र भाव चौथे स्थान मे बैठे है जो की बहुत अच्छा माना जाता है और उनका कारक भाव भी है !तो
पांचवे भाव मे बैठे शनि चंद्र विष योग बनाएंगे लेकिन यहाँ शनि देव बुरा फल देंगे और चंद्र देव भी यहाँ बुरा फल देंगे क्यूंकि चंद्र देव लग्नेश होकर त्रिकोण में नीच के होकर बैठे है तो अतिमारक हुए
छठे भाव मे बैठे शनि चंद्र दोनों विष योग बनाएंगे यहाँ दोनों ही बुरा फल देंगे क्यूंकि दोनों ग्रह मारक हुए, शनि देव भी विपरीत राजयोग पर नहीं आ सकते क्यूंकि लग्नेश चंद्र भी मारक है तो साफ है के






