शनि देव जी का ढैया –
जब गोचर का शनि जन्म कुंडली के चन्द्रमा से चौथे भाव या चौथी राशि में भ्रमण शुरू कर दे और आठवीं राशि में भ्रमण शुरू कर दे तो उस समय को शनि देव का
नीच भंग योग
१.जिस भाव (घर) में ग्रह नीच का है उसका मालिक उसके साथ आकर बैठे तो उसे नीच भंग योग कहा जाता है लेकिन डिग्री और ग्रह का बलाबल अवश्य देखें ।
उदाहरण कुंडली
अगर बाहरवें भाव का स्वामी चौथे भाव में हो तो विदेश में काम काज करने का योग बनता है।
उदारहण कुंडली
चौथे भाव मालिक जितना कमज़ोर होगा उतनी ही जल्दी विदेश में हमेशा रहने का योग बनता जायेगा।
लग्न कुंडली
मिथुन लग्न मे आठवें भाव मे मंगलीक भंग योग –
मिथुन लग्न मे आठवें भाव मे बैठा मंगल मंगलीक नही माना जायेगा क्यों की आठवें भाव मे मंगल उच्च के हो जाते है जो की अच्छा फल देने बाध्य हो
कर्क लग्न में चौथे भाव में मंगलीक भंग योग –
कर्क लग्न की कुंडली में अगर मंगल देवता चौथे भाव में हो तो मंगलीक भंग योग बनता है क्यों की
क्यों की मंगल ग्रह इस लग्न कुंडली में अति कारक
आप सब घर में तुलसी का प्लांट जरूर लगाए !
१.घर में बरकत रहती है !
२.बिमारियों से छुटकारा मिलता है !
३.रोज़ सुबह तुलसी के आगे घी का दीपक करने से ग्रह दोष दूर होते है !
४.घर में
मकर लग्न में पहले भाव में मंगलीक भंग योग –
मकर लग्न में मंगल देवता अगर पहले भाव में हो तो जातक मंगलीक नहीं होता क्यों की यहां पर मंगल ग्रह उच्च के हो होते है और रुचक नामक पंच
गुरु ग्रह वृष राशि में १–५–२०२४ से १५–५–२०२५ तक रहेंगे।गुरु ग्रह 1-5-2024 को वृष राशि मे प्रवेश कर रहे है 15 मई 2025 तक रहेंगे।
मेष-धन लाभ खर्चे कम सेंविंग ज्यादा के चांस।वृष-स्वास्थ्य का ध्यान रखें।मिथुन-विदेश
केतुदेव फलादेश 1 से 6 भाव कन्या लग्न
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
केतुदेव फलादेश 7 से 12 भाव कन्या लग्न…
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
राहुदेव फलादेश 1 से 6 भाव तुला लग्न
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
राहुदेव फलादेश 7 से 12 भाव तुला लग्न
7.सातवां भावफल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव -अच्छा
8.आठवां भाव फल-बुरा,राशि-उच्च,भाव-बुरा
9.नवम भाव फल-अच्छा,राशि-उच्च,भाव-अच्छा
10.दशम भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
11.ग्यारहवां भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
12.बारहवां भाव फल-बुरा,राशि-मित्र,भाव-बुरा
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं
वास्तु टिप्स
VASTU TIPS
जन्मकुंडली के आधार पर वास्तु टिप्स
अगर आपकी लग्न कुंडली यानि जन्म कुंडली मे सूर्य,मंगल नीच के,मारक,या राहु देव से दूषित और बुरे फल दें रहें हो तो आप आपने घर या कमरे मे ईशान कोण
केतुदेव फलादेश 1 से 6 भाव तुला लग्न…
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
केतुदेव फलादेश 7 से 12 भाव तुला लग्न…
7.सातवां भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव -अच्छा
8.आठवां भाव फल-बुरा,राशि-नीच,भाव-बुरा
9.नवम भाव फल-बुरा,राशि-नीच,भाव-अच्छा
10.दशम भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
11.ग्यारहवां भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
12.बारहवां भाव फल-बुरा,राशि-मित्र,भाव-बुरा
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि
क्या आप जानते है अगर आपकी जन्म कुंडली में राहु केतु शनि मंगल ग्रह अगर नीच-मारक-६,८,१२ भाव में हो या बुरे प्रभाव दे रहे हो तो हमे वास्तु के मुताबिक अपने घर या ऑफिस में वास्तु के मुताबिक सही
अक्सर हमें राहु देवता से डराया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है !
जहां भाव अच्छा दिया गया है वहां राहुदेव के कोई उपाय करने की जरुरत नहीं।
ज्यादातर हमे राहु देवता
जन्मकुंडली अनुसार उपयुक्त रत्न पुखराज
मेष लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,7,9,11 भावों अगर गुरु देव बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !
धातु-सोना,पीतल
ऊँगली-तर्जनी
दिन-गुरुवार
अधिक जानकारी के अच्छे ज्योतिषचार्य को जन्म कुंडली जरूर दिखाएं












