गोचर का विवेचन-गोचर कैसे देखें जन्म कुंडली में।
गोचर जन्म कुंडली का विस्लेषण करते समय बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
इसलिए लग्न कुंडली की विवेचना (व्याख्या) करते समय इस का खास ध्यान रखना चाहिए।
गोचर को सदा लागु करते समय
सिंह लग्न में सातवें में भाव मंगलीक भंग योग-
सिंह लग्न की कुंडली में अगर मंगल देवता सातवें भाव में हो तो मंगलीक भंग योग बनता है क्यों की मंगल ग्रह इस लग्न कुंडली में अति योगकारक है और लग्नेश
मेष लग्न मे मंगलीक भंग योग –
ज्योतिष के मुताबिक मेष लग्न में सातवें भाव में बैठा मंगल अति योगकारक है और पंचमहापुरुष बना रहा है जिस कारण मंगलीक भंग योग बनता है !
पंचमहापुरुष योग -मंगल अगर केंद्र
तुला लग्न में प्रथम भाव में मंगलीक भंग योग-
तुला लग्न की कुंडली में अगर मंगल देवता पहले भाव में हो तो मंगलीक भंग योग बनता है क्यों की यहां बैठा मंगल अपनी सातवीं दृष्टी अपने ही घर पर पड़ती
कन्या लग्न में बारहवें भाव में मंगलीक भंग योग-
कन्या लग्न की कुंडली में अगर मंगल देवता बारहवें भाव में हो तो मंगलीक भंग योग तब बनता है जब लग्नेश बुध बलि हो तो विपरीत राजयोग भी बनाता है जो
व्यपार करने वालों को अक़्सर व्यपार ना चलने की यह समस्या आखिर आती
रहती है उनका एक लक्ष्य होता है के उनका व्यापार चलता रहें इतना उपाय
टोटके करने के बावजूद
राहु चंद्र ग्रहण भंग योग सभी लग्न
राहु चंद्र से ग्रहण योग होता है तो ग्रहण भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका ज्ञान होता है। उदाहरण के तौर पर मैंने सभी लग्न वालों के लिए कहां-कहां
क्या आप जानते है अंगारक भांग योग कैसे होता है ?
राहु और मंगल की युति से अगर अंगारक योग होता है तो अंगारक भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका ज्ञान होता
क्या आप जानते है अंगारक भांग योग कैसे होता है ?
राहु और मंगल की युति से अगर अंगारक योग होता है तो अंगारक भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका ज्ञान होता
सिंह लग्न में कहाँ-कहाँ अंगारक भंग योग बनता है जानिए ।
राहु मंगल से अंगारक योग होता है तो अंगारक भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका ज्ञान होता है!उदाहरण के तौर पर यहां
कहाँ-कहाँ अंगारक भंग योग बनता है जानिए ।
राहु मंगल से अंगारक योग होता है तो अंगारक भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका ज्ञान होता है!उदाहरण के तौर पर कर्क लग्न वालों
मेष लग्न में कौन-कौन से भाव में राहु मंगल स्तिथ हो तो अंगारक भंग योग बनता है ।
राहु मंगल से अंगारक योग होता है तो अंगारक भंग योग भी बनता है बहुत कम जानकारों को इसका
अंगारक योग
सबसे पहले आपको बता दूँ की राहु मंगल की युति अंगारक योग बनाती है ना की दोष क्यों की ग्रह कभी भी दोष नहीं बनाते जबकि योग बनाते है!22-2-2021 से लेकर 24-4-2021 तक राहु
जानिए कुम्भ लग्न वाले कब पहन सकते है पुखराज रत्न।
कुम्भ लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,7,9,10,11 भावों अगर गुरु ग्रह बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने की विधि-
जानिए धनु लग्न वाले कब पहन सकते है पुखराज रत्न।
धनु लग्न की कुंडली मे 1,4,5,7,9,10,11 भावों अगर गुरु ग्रह बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !धारण करने की विधि-धातु-सोना,पीतल, पक्ष-शुक्लऊँगली-तर्जनी,दिन-गुरुवारसमय-सूर्य उदय के
पुखराज रत्न कब पहन सकते है वृश्चिक लग्न।
वृश्चिक लग्न की कुंडली मे 1,2,4,5,7,9,10,11 भावों अगर गुरु ग्रह बैठे हो तो पुखराज रत्न धारण किया जा सकता है !
धारण करने की विधि-
धातु-सोना,पीतल, पक्ष-शुक्ल
ऊँगली-तर्जनी,दिन-गुरुवार
समय-सूर्य
राहुदेव फलादेश वृश्चिक लग्न 7 से 12 भाव
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
कार्तिक मास,उपाय,और फलादेश
कार्तिक मास 18-10-2020 से 21-11-2020 तक !
जन्मकुंडली मे ज़ब सूर्य देव तुला राशि या नीच के हो तो उस जातक को कार्तिक की पूजा या सूर्य देव के दान अवश्य करने चाहिए,ज़बकी लग्न कुंडली मे सूर्य















