अक्षय तिथी का महत्व,कारण और फ़लादेश। इस दिन हमें क्या करना चाहिए?

भगवान शिव ने इस दिन माता लक्ष्मी एवं कुबेर को जगत् सम्पत्ति एवं धन का संरक्षक नियुक्त किया था। इसीलिए इस दिन सोना, चाँदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ खरीदने का विशेष महत्त्व है।
इस प्रकार सूर्य एवं चन्द्रमा का पूर्ण बली होना इस दिन को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बनाता है, क्योंकि वेदों के अनुसार सूर्य को इस सकल ब्रह्माण्ड का आत्मा माना जाता है, जबकि चन्द्रमा मानव मन को अत्यधिक प्रभावित करता है, अतः इस दिन मन एवं आत्मा के कारक पूर्ण बली होते हैं, जो पूर्ण सफलता, समृद्धि एवं आन्तरिक सुखानुभूति के वाहक बन जाते हैं।
इस दिन गाय, भूमि, तिल, स्वर्ण घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चाँदी, नमक, शहद और कन्या ये 12 वस्तुएँ दान करने का महत्त्व है। जो भी भूखा हो, वह अन्न दान का पात्र है। जो जिस वस्तु की इच्छा रखता है, यदि वह वस्तु उसे बिना माँगे ही दे दी जाए, तो दाता का पूरा फल मिलता है। सेवक को दिया दान एक-चौथाई फल देता है।
कन्या दान इन सभी दानों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होता है। इसीलिए इस दिन कन्या का विवाह किया जाता है। इस प्रकार अक्षया तृतीया को जो भी दान किया जाता है, वह ‘अक्षय’ हो जाता है। दान देने वाला सूर्य लोक को प्राप्त होता है। इस तिथि को जो व्रत करता है वह ऋद्धि, सिद्धि, वृद्धि एवं श्री से सम्पन्न होता है।
इस दिन किए गए अच्छे एवं बुरे सभी कर्म तथा स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि ‘अक्षय’ हो हो जाता हैँ।

