वृष लग्न में मंगलीक भंग योग –
वृष लग्न अगर मंगल देवता चौथे भाव में हो तो जातक/जातिका को मंगलीक नहीं माना जाता क्यों की
मंगल देवता चौथे भाव में चौथी दृष्टि अपने ही घर सातवें भाव पर पड़ती
मांगलिक भंग योग
अभी तक अपने सीखा की मांगलिक योग कैसे होता है लेकिन यह बात ध्यान देने योग्य है की कुछ
कारणवश मांगलिक योग भंग भी हो जाता है । परन्तु अल्प-ज्ञानी ज्योतिष एवं पंडित मांगलिक योग का
परिहार कैसे
वृष लग्न द्वादश भाव में मंगलीक भंग योग –
वृष लग्न में अगर मंगल देवता द्वादश भाव में हो तो जातक/जातिका को मंगलीक नहीं माना जाता क्यों की
मंगल देवता द्वादश में अपने ही घर पर बैठे है( स्वराशि
२.अगर लग्न कुंडली में जिस भाव में नीच का ग्रह हो और उसी भाव का मालिक उस पर दृष्टी डाल दें तो भी नीच भंग योग कहा जाता है । लेकिन डिग्री और ग्रह का बलाबल अवश्य देख लें ।
३.जिस भाव (घर) में ग्रह नीच का पड़ा हो और उसी भाव में ग्रह उच्च का आ जाये तो भी नीच भंग योग कहा जाता है । लेकिन डिग्री और ग्रह का बलाबल अवश्य देख लें ।
उदाहरण कुंडली
शनि देव जी का ढैया –
जब गोचर का शनि जन्म कुंडली के चन्द्रमा से चौथे भाव या चौथी राशि में भ्रमण शुरू कर दे और आठवीं राशि में भ्रमण शुरू कर दे तो उस समय को शनि देव का
नीच भंग योग
१.जिस भाव (घर) में ग्रह नीच का है उसका मालिक उसके साथ आकर बैठे तो उसे नीच भंग योग कहा जाता है लेकिन डिग्री और ग्रह का बलाबल अवश्य देखें ।
उदाहरण कुंडली
अगर बाहरवें भाव का स्वामी चौथे भाव में हो तो विदेश में काम काज करने का योग बनता है।
उदारहण कुंडली
चौथे भाव मालिक जितना कमज़ोर होगा उतनी ही जल्दी विदेश में हमेशा रहने का योग बनता जायेगा।
लग्न कुंडली
मिथुन लग्न मे आठवें भाव मे मंगलीक भंग योग –
मिथुन लग्न मे आठवें भाव मे बैठा मंगल मंगलीक नही माना जायेगा क्यों की आठवें भाव मे मंगल उच्च के हो जाते है जो की अच्छा फल देने बाध्य हो
कर्क लग्न में चौथे भाव में मंगलीक भंग योग –
कर्क लग्न की कुंडली में अगर मंगल देवता चौथे भाव में हो तो मंगलीक भंग योग बनता है क्यों की
क्यों की मंगल ग्रह इस लग्न कुंडली में अति कारक
आप सब घर में तुलसी का प्लांट जरूर लगाए !
१.घर में बरकत रहती है !
२.बिमारियों से छुटकारा मिलता है !
३.रोज़ सुबह तुलसी के आगे घी का दीपक करने से ग्रह दोष दूर होते है !
४.घर में
रोज़ रात को सोने से पहले अगर मोर पंख से हवा ली जाये तो ऊपरी हवा और बुरी नज़र से छुटकारा मिलता है,शनि,राहु,केतु देवता को शांति मिलती है और इनके बुरे प्रभाव कम होते है।
यह भी कहा जाता है
मकर लग्न में पहले भाव में मंगलीक भंग योग –
मकर लग्न में मंगल देवता अगर पहले भाव में हो तो जातक मंगलीक नहीं होता क्यों की यहां पर मंगल ग्रह उच्च के हो होते है और रुचक नामक पंच
गुरु ग्रह वृष राशि में १–५–२०२४ से १५–५–२०२५ तक रहेंगे।गुरु ग्रह 1-5-2024 को वृष राशि मे प्रवेश कर रहे है 15 मई 2025 तक रहेंगे।
मेष-धन लाभ खर्चे कम सेंविंग ज्यादा के चांस।वृष-स्वास्थ्य का ध्यान रखें।मिथुन-विदेश
केतुदेव फलादेश 1 से 6 भाव कन्या लग्न
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
केतुदेव फलादेश 7 से 12 भाव कन्या लग्न…
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
राहुदेव फलादेश 1 से 6 भाव तुला लग्न
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं होती,राहु और केतु देवता मित्र राशि या उच्च हों और अच्छे भाव मे बैठे हो तो अच्छा फल
राहुदेव फलादेश 7 से 12 भाव तुला लग्न
7.सातवां भावफल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव -अच्छा
8.आठवां भाव फल-बुरा,राशि-उच्च,भाव-बुरा
9.नवम भाव फल-अच्छा,राशि-उच्च,भाव-अच्छा
10.दशम भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
11.ग्यारहवां भाव फल-बुरा,राशि-शत्रु,भाव-अच्छा
12.बारहवां भाव फल-बुरा,राशि-मित्र,भाव-बुरा
लग्न कुंडली यानि जन्मकुंडली मे राहु और केतु देवता की कोई भी स्वराशि नहीं







