परिभाषा -अगर लग्न कुंडली में त्रिक स्थान का मालिक (६,८,१२) त्रिक स्थान में ही बैठा हो तो वो अपनी दशा ,अन्तरदशा में सदैव अच्छा फल देता है पर लग्नेश बलि अवश्य होना चाहिए ।
लेकिन
अगर लग्न कुंडली में लग्नेश
राजयोग और योग की परिभाषा योग (युति योग)-
दो ग्रहों का एक साथ बैठना ही योग कहलाता है। एक साथ बैठे ग्रहों को युति भी कहते है।योग जन्म लग्न कुंडली के मुताबिक अच्छा या बुरा फल
विमल विपरीत राजयोग-
अगर लग्न कुंडली में बाहरवें घर का मालिक ६,८,१२ भाव में पड़ा हो तो वो विमल विपरीत राजयोग माना जाता है । अगर बाहरवें भाव का मालिक ६,८,१२ में पड़ा हो और बुरे ग्रहों के साथ युति
सरल विपरीत राजयोग-
अगर लग्न कुंडली में आठवें घर का मालिक ६,८,१२ भाव में पड़ा हो तो वो सरल विपरीत राजयोग माना जाता है । अगर आठवें भाव का मालिक ६,८,१२ में पड़ा हो और बुरे ग्रहों के साथ युति
अगर छठे भाव का स्वामी लग्न कुंडली में ६,८,१२ में बैठा हो तो उसे हर्ष विपरीत राजयोग कहा जाता है।
लग्नेश अगर बली हो तभी ही विपरीत राजयोग के फल प्राप्त होंगे लग्नेश बली और डिग्री वाइज बलाबल होना जरूरी
योग (युति योग) की परिभाषा-
दो ग्रहों का एक साथ बैठना ही योग कहलाता है। एक साथ बैठे ग्रहों को युति भी कहते है।
योग जन्म लग्न कुंडली के मुताबिक अच्छा या बुरा फल देते है।
शुभ योग जानने
रक्षा बंधन 28-8-2026 को भद्रा का साया पूरे दिन नहीं है।
पूर्णिमा सुबह 9:47 तक रहेगी।
राखी बांधने का समय -सुबह 6:02 से 9:47 तक ।दूसरा मुहूर्त (दोपहर) -12:28 से 2:00 बजे तक।वर्जित
तुला लग्न मे शुभ फल -व्यवसाय लोन से छुटकारा, धन लाभ।तुला लग्न मे अशुभ फल -व्यवसाय मे परेशानी, मेहनत ज्यादा लाभ कम, माता एंव भूमि सुख मे कमी।
वृश्चिक लग्न मे शुभ फल -भाग्य मे वृद्धि,
कर्क लग्न शुभ फल -स्वास्थ्य मे सुधार,विद्या मे लाभ, विवाह योग,अचानक धन प्राप्ति के योग, धार्मिक यात्रा से लाभ।कर्क लग्न अशुभ फल-डिप्रेशन की समस्या,लव विवाह मे असफलता, पेट की समस्या।
सिंह लग्न शुभ फल -विदेश योग,जमानत
अक्षय तृतीय का शुभ मुहूर्त त्रिपुष्कर योग 19-04-2026 को 7:10 से 10:50 तक।
भगवान शिव ने इस दिन माता लक्ष्मी एवं कुबेर को जगत् सम्पत्ति एवं धन का संरक्षक नियुक्त किया था। इसीलिए इस दिन सोना, चाँदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ खरीदने का विशेष महत्त्व है।
इस प्रकार सूर्य
मेष-शनि देव द्वादश मे रहने पर अशुभ प्रभाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यात्रा ज्यादा रहेगी।वृषभ-शनि देव एकादश भाव मे होने से धर्म-कर्म की रूचि बढ़ेगी रुके काम बनेगे। जून के बाद और बेहतर।मिथुन-दशमस्थ शनि शुभ है। आय मे
अमावस्या समय 20 अक्टूबर 2025 दोपहर 15:45 से 21 अक्टूबर 2025 शाम 17:55 तक
कर्क लग्न की कुंडली मे लग्न मे चंद्र स्वराशि के, और उच्च के गुरु हो, शुक्र और चौथे भाव मे स्वराशि के, मंगल पंचम भाव मे स्वराशि के हो तो राजयोग बनता है, जातक राजा के सम्मान ऐश्वर्या ऐंव
मिथुन लग्न की कुंडली मे लग्न मे बुध स्वराशि के, तीसरे भाव मे स्वराशि के सूर्य और छठे भाव मे मंगल स्वराशि के, अस्टम भाव मे शनि देव स्वराशि के हो तो राजयोग बनता है, जातक राजा के सम्मान
वृष लग्न की कुंडली मे लग्न मे शुक्र स्वराशि के, पंचम भाव मे उच्च के बुध और दशम भाव मे शनि स्वराशि के हो तो राजयोग बनता है, केंद्र और त्रिकोण बलि होने के कारण जातक राजा के सम्मान














